Mixed Cropping: मिश्रित फसल की खेती के सहारे आज लाखों रुपये का उत्पादन कर रहा है यह किसान
Mixed Cropping: अमरेली क्षेत्र के एक दूरदर्शी किसान ने पारंपरिक कृषि (traditional agricultural) पद्धतियों से हटकर मिश्रित फसलों का सफल प्रयोग किया है। उन्होंने टेटी और गोभी दोनों को एक साथ उगाना शुरू किया है और इससे उन्हें काफी मुनाफा हो रहा है। यह तरीका उन किसानों के लिए भी प्रेरणादायी है जो कृषि मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग और प्रत्यक्ष बिक्री के जरिए अपना मुनाफा बढ़ाना चाहते हैं। 18 बीघा जमीन पर टेटी और 6 बीघा पर गोभी उगाकर इस किसान ने लाखों रुपये की फसल पैदा की है।

धर्मेशभाई मथुकिया का कमाल
अमरेली जिले के कुंकावाव तालुका के अमरपुर गांव में रहने वाले 45 वर्षीय धर्मेशभाई मथुकिया ने सिर्फ आठवीं कक्षा तक की शिक्षा हासिल की है, लेकिन उनकी कृषि विशेषज्ञता ने उन्हें एक समृद्ध किसान बनने में मदद की है। उनके पास 90 बीघा जमीन है, जिसमें से 18 बीघा पहली बार है जब उन्होंने तंबाकू और गोभी (Tobacco and cabbage) को एक साथ उगाने की कोशिश की है। अपनी इस पहल की वजह से उन्होंने हजारों रुपये की कमाई की है।
टेटी की खेती ने किया मालामाल
धर्मेशभाई ने 18 बीघे में टेटी की खेती की है, जिसमें से हर प्लॉट पर 800-1000 डिब्बे तैयार हो रहे हैं। एक पैकेट का वजन 5 किलोग्राम है। अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट जैसे बड़े बाज़ारों में टेटी की मिठास और गुणवत्ता (Sweetness and quality) के कारण इसे बेचा जाता है। उन्होंने 4 से 5 बीघे में मिश्रित फसल के रूप में गोभी भी उगाई है, जो अब 10 रुपये प्रति किलो बिक रही है। एक बीघे में करीब 500 मन गोभी पैदा करके बीस से पच्चीस हज़ार रुपये कमाए जा सकते हैं। गोभी उगाने से धर्मेशभाई को कुल मिलाकर करीब 1 लाख रुपये का मुनाफ़ा होना चाहिए।
खुदरा बिक्री के जरिए शानदार कमाई
धर्मेशभाई के मुताबिक, उन्होंने टेटी उगाने के तरीके में सुधार किया है। कुल अठारह बीघे में टेटी उगाने (Tati growing) के लिए छह-छह बीघे के तीन प्लॉट का इस्तेमाल किया गया है। एक बीघे में उत्पादन दो लाख रुपये है, जबकि खर्च सिर्फ़ 50,000 रुपये है। दूसरे शब्दों में कहें तो हर बीघा में 1.50 लाख रुपए का मुनाफा होता है। इसके परिणामस्वरूप अब उनका पूरा उत्पादन 19 लाख रुपए हो गया है। खास बात यह है कि धर्मेशभाई अपने माल को बाजार में बेचने के बजाय सीधे ग्राहकों को और खुले बाजार में बेचते हैं, जिससे उनकी कीमत में सुधार होता है।
दूसरे किसानों की प्रेरणा का स्त्रोत
धर्मेशभाई के अनुसार, मजदूरों का एक समूह तड़के की गाड़ियाँ सूरत, अहमदाबाद और वडोदरा ले जाता है, जहाँ उन्हें बेचा जाता है। इसके विपरीत, कुछ किसानों को अपने उत्पादों के लिए बहुत कम कीमत मिलती है क्योंकि वे उन्हें थोक दरों पर बाजारों में बेचते हैं।