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Bitter gourd cultivation: किसान ने केवल 6 महीने में उगाई ये सब्जी, 2 एकड़ जमीन पर कमाया 4 लाख का मुनाफा

Bitter gourd cultivation: बदलते समय के साथ किसान नई कृषि तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, क्योंकि वे परंपरागत खेती से अलग हटकर खेती कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हो सकती है। दरअसल, केवल फसलों पर निर्भर रहने से किसानों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से परंपरागत खेती के अलावा किसान सब्जियों की खेती पर जोर दे रहे हैं। इसमें करेला, टमाटर, फूलगोभी, खीरा, कद्दू, झींगा और लौकी शामिल हैं।

Bitter gourd cultivation
Bitter gourd cultivation

खीरे की खेती से मिलेंगे कई फायदे

किसानों के लिए खीरे की खेती के कई फायदे हैं। बाजार में इसकी अच्छी मांग होने के कारण किसान हजारों रुपये का मुनाफा कमा सकते हैं। अररिया जिले के रामपुर के किसान मोहम्मद अनवारुल हक करीब दो एकड़ जमीन पर करेला उगाते हैं, जिससे उन्हें सालाना 4 लाख रुपये से ज्यादा की आमदनी होती है। हालांकि इस साल कम बारिश के कारण मुनाफा कम हुआ, लेकिन फिर भी अच्छा रहा। उन्होंने कहा कि इस फसल से कम लागत में ज्यादा मुनाफा होता है। उन्होंने कहा कि करेला (Bitter gourd ) में फल लगना शुरू हो गया है और अक्टूबर तक फल लग जाएंगे।

2 एकड़ जमीन पर 4 लाख का मुनाफा

अररिया जिले के रानीगंज प्रखंड के रामपुर गांव के किसान मोहम्मद अनवारुल हक ने मीडिया को बताया कि इस साल करेले से उन्हें बहुत अच्छी कमाई हुई है, लेकिन अगर बारिश अच्छी होती तो वे इससे भी ज्यादा कमा सकते थे। उन्होंने मीडिया को बताया कि वे पिछले पांच साल से करेला उगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस सीजन में दो एकड़ जमीन पर करेला (Bitter gourd) उगाकर उन्होंने करीब 4 लाख रुपये कमाए हैं।

करेले की खेती (Bitter gourd) का यह अनोखा तरीका

रामपुर, अररिया निवासी मोहम्मद अनवारुल हक ने लोकल 18 को बताया कि वे पिछले पांच साल से सब्जियां उगा रहे हैं। अब वे अपने खेतों में करेले की फसल उगा रहे हैं। यह फसल उन्होंने मार्च और अप्रैल में बोई थी। यह फसल बोने के बाद लगातार छह महीने तक अच्छी पैदावार देती है। इस समय अररिया के वातावरण में करेले की कई किस्में उगाई जा सकती हैं। करेले की खेती के लिए फरवरी से मार्च और जून से अक्टूबर का महीना खास तौर पर फायदेमंद होता है। उनका दावा है कि इस फसल की तैयारी में अक्सर तीस हजार रुपए खर्च होते हैं। जब फसल पक जाती है तो उसे तुरंत बेच दिया जाता है और अगर दाम सही मिले तो इस फसल से दो से सवा लाख रुपए प्रति बीघा तक की कमाई हो जाती है।

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