Mango Cultivation: अब आम की खेती करने वाले किसानों को ये बड़ी सहायता दे रही है सरकार, जानिए पूरी डिटेल
Mango Cultivation: आम भारत का राष्ट्रीय फल है और इसे “फलों का राजा” कहा जाता है। भारत में, खास तौर पर तेलंगाना में, आम की खेती बड़े पैमाने (large scale) पर की जाती है। राज्य के कई जिलों में किसानों द्वारा उगाई जाने वाली मुख्य फसल आम है। संयुक्त वारंगल जिले में मिर्च के बाद आम दूसरी सबसे ज़्यादा पैदा होने वाली फसल है। वारंगल बागवानी विभाग के प्रतिनिधि राकेश के अनुसार, इस क्षेत्र में लगभग 35,000 एकड़ ज़मीन पर आम की खेती की जाती है। यहाँ बंगिनापल्ली किस्म (Banginapalli variety) के आम उगाए जाते हैं।

ओलावृष्टि से बचाव का एक नया तरीका
अप्रैल और मई में ओलावृष्टि से पिछले 10 सालों में आम की फसल को काफ़ी नुकसान हुआ है। फलों को बैग में पैक करना इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान (Long Term Solutions) लगता है। इस बैगिंग विधि का उपयोग करने वाले आम उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं और बाज़ार में ज़्यादा कीमत पाते हैं। किसानों को अतिरिक्त लाभ प्रदान करने के लिए अब बागवानी विभाग द्वारा इस प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा रहा है।
आप आमों को कैसे पैक करते हैं
आम की फसल को डबल लेयर वाले बैग में उगाया जाता है, जिसकी लंबाई 18 से 30 सेमी तक होती है। चूंकि ये बैग वाटरप्रूफ होते हैं, इसलिए बारिश से फलों को नुकसान नहीं होगा। जब फली का वजन 100 से 150 ग्राम के बीच हो जाता है, तो एक बार कीटनाशक उपचार के बाद फल को बैग में रख दिया जाता है। किसान जितने भी फलों तक पहुंच सकता है, उन्हें बैग में रखा जाता है। बैग में 40 से 60 दिनों के बाद आम की गुणवत्ता में काफी सुधार होता है।
बैगिंग के फायदे
बैग में रखे गए आम बहुत बेहतर होते हैं क्योंकि वे कीड़ों और अन्य बाहरी कारकों से सुरक्षित रहते हैं। आम का रंग सुनहरा हो जाता है क्योंकि बाजार में भेजे जाने से पंद्रह दिन पहले बैग हटा दिए जाते हैं। फिर उन्हें काटा जाता है और बिक्री के लिए पेश किया जाता है। फसल की गुणवत्ता बढ़ाने के अलावा, यह तरीका किसानों के मुनाफे को भी बढ़ाता है।
बाजार में आम के दाम बढ़ गए हैं
वारंगल क्षेत्र के कई बागवानों ने पिछले साल इस रणनीति का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया। उस समय सामान्य आम की कीमत 20 रुपये प्रति किलो थी, जबकि बैग वाले आम की कीमत 65 से 70 रुपये प्रति किलो थी। अगर एक एकड़ में चार टन आम का उत्पादन होता है तो बैगिंग से किसानों को काफी फायदा हो सकता है। बैग का इस्तेमाल तीन सीजन तक किया जा सकता है, हालांकि दो बैग की कीमत करीब 100 रुपये है।
सरकारी सब्सिडी
इस साल से किसानों को बैगिंग तकनीक (Bagging Technique) का इस्तेमाल करने के लिए बागवानी विभाग से सब्सिडी मिल रही है। एक किसान को पांच एकड़ तक की फसल के लिए 12,500 बैग मिलेंगे। इस योजना के तहत सरकार द्वारा दी जा रही 10 लाख रुपये की सब्सिडी से किसानों को काफी फायदा होगा।