AGRICULTURE

Wheat Cultivation: गेहूं की खेती में करें इस उन्नत किस्म का प्रयोग, जानें फायदे

Wheat Cultivation: भारत में, गेहूँ उगाना बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर उत्तरी क्षेत्रों में जहाँ इसे मुख्य फसल के रूप में उगाया जाता है। किसानों को सही किस्म चुनने और सही उत्पादन तकनीक का उपयोग करने से लाभ हो सकता है क्योंकि इससे न केवल उत्पादन बढ़ता है बल्कि गुणवत्ता भी बढ़ती है। ये कुछ मुख्य उन्नत गेहूँ की किस्में (Improved Wheat Varieties) हैं जो विभिन्न जलवायु क्षेत्रों और कृषि संबंधी परिस्थितियों के लिए उपयुक्त हैं।

Wheat cultivation
Wheat cultivation

उन्नत गेहूँ की HD 3226 किस्म

HD 3226 किस्म विशेष रूप से उत्तर-पश्चिम के मैदानी इलाकों (Plains) के लिए बनाई गई थी। यह पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान (कोटा और उदयपुर के संभागों को छोड़कर), पश्चिमी उत्तर प्रदेश (झाँसी के संभाग को छोड़कर), जम्मू और कश्मीर के जम्मू और कठुआ जिले, हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले और पांवटा घाटी और उत्तराखंड में विशेष रूप से अच्छी तरह से काम करती है।

खेती: तराई क्षेत्र में, यह समय पर बीज बोने और सिंचाई के लिए उपयुक्त है।

उपज: औसतन 57.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, लेकिन समय पर बीज बोने और अच्छे कृषि प्रबंधन से 79.60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त किया जा सकता है।

लाभ: समय पर रोपण और बेहतर कृषि प्रबंधन के साथ, यह किस्म किसानों को उच्चतम उपज प्रदान कर सकती है।

उन्नत गेहूं किस्म एचडी 3086 (पूसा गौतमी)

एचडी 3086, जिसे पूसा गौतमी के नाम से भी जाना जाता है, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। इसके अतिरिक्त, यह किस्म भूरे रतुआ और पीले रतुआ (Rust and Yellow Rust) रोगों के लिए प्रतिरोधी है, इसलिए यह रोग प्रभावित क्षेत्रों में भी पनप सकती है।

खेती: सिंचित परिस्थितियों और समय पर बीज बोने के लिए अनुकूल।

उत्पादन:

उत्तर पश्चिमी मैदानों में औसतन 54.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, अधिकतम 81 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है।

उत्तर पूर्वी मैदानों में औसतन 50.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज होती है।

उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में पकने में 145 दिन लगते हैं, जबकि उत्तर पूर्वी क्षेत्र में 121 दिन लगते हैं।

क्षेत्र: जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश।

उन्नत गेहूँ किस्म HD 2967

HD 2967 एक ऐसी किस्म है जिसे विशेष रूप से उत्तर पूर्वी मैदानों के लिए बनाया गया था। इसमें प्रोटीन, आयरन और जिंक की उच्च मात्रा होने के कारण यह आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा है और इसका उपयोग ब्रेड और रोटी (Bread and Roti) बनाने के लिए किया जा सकता है।

खेती: समय पर पानी देने और बोने पर बेहतरीन परिणाम मिलते हैं।

उपज: औसतन 45.5 क्विंटल/हेक्टेयर, अधिकतम 65.5 क्विंटल/हेक्टेयर।

पकने की अवधि 122 दिन

मुख्य विशेषताओं में गोल दाना (प्रति 1000 दानों पर 39 ग्राम वजन), 2% प्रोटीन सामग्री, आयरन 7 पीपीएम, जिंक 46.8 पीपीएम, और पीले और भूरे रंग के रतुआ रोगों के प्रति प्रतिरोध शामिल हैं।

क्षेत्र: बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों के मैदान।

उन्नत गेहूँ की किस्म HD 3118 (पूसा वत्सला)

पूसा वत्सला, या HD 3118, एक बेहतर किस्म है जो विशेष रूप से देर से बोई जाने वाली और सिंचित वातावरण (Irrigated Environment) के लिए उपयुक्त है। यह किस्म उच्च गुणवत्ता वाली चपातियाँ बनाने के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है क्योंकि यह जल्दी पक जाती है।

खेती: सिंचाई और देर से बुवाई के लिए उपयुक्त।

उपज: औसतन 41.7 क्विंटल/हेक्टेयर, जिसमें अधिकतम 66.4 क्विंटल/हेक्टेयर है।

पकने की अवधि 112 दिन

महत्वपूर्ण विशेषताओं में चपाती की गुणवत्ता (Quality of Chapati) (मान 7.5), पीले और भूरे रंग के रतुआ रोगों के प्रति प्रतिरोध और 8% गीला ग्लूटेन शामिल हैं।

क्षेत्र: पूर्वोत्तर राज्यों के मैदानी क्षेत्र, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल (पहाड़ियों के अलावा) और पूर्वी उत्तर प्रदेश।

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