Potato harvest: आलू की फसल में झुलसा रोग का जानें कारण और बचाव के उपाय
Potato harvest: झारखंड के हजारीबाग क्षेत्र के किसानों के लिए आलू उगाना आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। हालांकि, हाल के वर्षों में आलू उत्पादन के लिए ब्लाइट एक खतरा बन गया है। इस बीमारी के तेजी से फैलने और पूरी फसल नष्ट होने के परिणामस्वरूप किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। इस साल भी कई किसान इस बीमारी से प्रभावित हुए हैं।
आलू (Potato) की फसल में ब्लाइट बीमारी: यह क्या है?
ब्लाइट बीमारी (Blight disease) नामक फंगस आलू की फसल को पत्तियों से लेकर जड़ों तक नुकसान पहुंचाता है। अगर उपचार में देरी की जाए तो यह बीमारी एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में फैलने की क्षमता रखती है।
ब्लाइट बीमारी दो प्रकार की होती है:
शुरुआती चरण में ब्लाइट: सबसे पहले पत्तियों पर छोटे-छोटे काले दाने दिखाई देते हैं। इन दानों के एक साथ आने पर पूरी पत्ती धीरे-धीरे नष्ट हो जाती है।
लेट-स्टेज ब्लाइट: पौधों की सबसे ऊपरी पत्तियों से यह बीमारी शुरू होती है। सबसे पहले, ऊपरी पत्तियां सूखने लगती हैं और फिर वायरस धीरे-धीरे जड़ों तक पहुँच जाता है।
ब्लाइट के कारण
फंगल संक्रमण: फंगस फसल के आस-पास की मिट्टी और नमी वाली स्थितियों में बढ़ता है।
मौसम: लगातार नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव से ब्लाइट को बढ़ावा मिलता है।
खराब बीज: इस बीमारी के फैलने का मुख्य कारण अनुपचारित बीज और दूषित मिट्टी है।
ब्लाइट के लक्षण
प्रारंभिक ब्लाइट: पत्तियों पर काले-भूरे रंग के दाने बनने लगते हैं, जो अंततः फैलकर पूरी पत्ती को नष्ट कर देते हैं।
ऊपरी पत्तियों का सूखना लेट ब्लाइट कहलाता है।
आखिरकार, वायरस धीरे-धीरे पूरे पौधे को प्रभावित करने के बाद जड़ों तक फैल जाता है।
ब्लाइट से बचने के उपाय
कृषि विशेषज्ञ डॉ. सत्य प्रकाश विश्वकर्मा ने ब्लाइट बीमारी को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए:
1. बीज उपचार: रोपण से पहले, बीजों को फफूंदनाशक उपचार की आवश्यकता होती है।
इससे बीमारी की शुरुआती रोकथाम में मदद मिलती है।
2. फसल की देखभाल: नियमित आधार पर फसल की निगरानी करें।
जैसे ही बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई दें, उपचार शुरू कर दें।
3. फसल रोग प्रबंधन: दूषित पौधों को तुरंत खेत से हटा देना चाहिए।
खेत की सफाई और हवा का प्रवाह बनाए रखें।
4. छिड़काव: ब्लाईट रोग से बचने के लिए नैटियन का 0.5% पत्तियों पर छिड़काव करें।
जब रोग बिगड़ता है, तो फफूंदनाशक का छिड़काव करें।
5. फसल चक्र लागू करें: हर साल अपनी फसल बदलने की आदत डालें।
इससे मिट्टी में फफूंद लगने की संभावना कम हो जाती है।
किसानों के लिए कुछ सुझाव
ब्लाईट रोग को रोकने और ठीक करने के लिए, समय-समय पर कृषि विशेषज्ञों से मदद लें। खेती के दौरान, सब कुछ साफ रखने का विशेष ध्यान रखें। सुनिश्चित करें कि खेत की जल निकासी सही तरीके से हो। रासायनिक और जैविक उपचारों का उचित अनुपात लागू करें।