Chilli Cultivation : गर्मियों में बेहद मजे से खाई जाती है तंजावुर मिर्च, भर जाती हैं किसानों की जेबें
Chilli Cultivation: गर्मी आते ही लोग ज़्यादा ठंडी चीज़ें खाने लगते हैं। इस मौसम में लोग मोर मिर्च (सूखी दही वाली मिर्च) का स्वाद और ताज़गी (Taste and freshness) पसंद करते हैं। हर साल तमिलनाडु के तंजावुर जिले में बहुत ज़्यादा मोर मिर्च उगाई जाती है। इस साल भी कई इलाकों में स्थानीय स्तर पर इसका अच्छा उत्पादन हुआ है।

मोर मिर्च तंजावुर की एक अनूठी पहचान बन गई है
तमिलनाडु में, तंजावुर मोर मिर्च के उत्पादन (production of chillies) में सबसे आगे है। थिरुकनुरपट्टी, वल्लम, मारुंगुलम, समीपट्टी और ओरट्टानाडु के इलाकों में, मोर मिर्च 500 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन पर उगाई जाती है। इस अनोखी मिर्च का दूसरा नाम इसकी लोकप्रियता के कारण “तंजावुर मोर मिर्च” है।
60 वर्षीय किसान गोविंदराज का कृषि करियर काफ़ी समृद्ध था
सामीपट्टी गांव में अपने आधे एकड़ के भूखंड पर 60 वर्षीय किसान गोविंदराज मोर मिर्च उगा रहे हैं। उनकी पत्नी नीलावती भी खेती में उनकी मदद करती हैं। दोनों मिलकर मिर्च की कटाई करते हैं, जिसे वे स्थानीय समुदायों (Local communities) और साप्ताहिक बाजारों में बेचते हैं।
कम लागत में अधिक लाभ
गोविंदराज का दावा है कि पहले हर 15 दिन में 10 किलो मिर्च इकट्ठी होती थी, लेकिन समय के साथ यह संख्या बढ़कर 100 किलो हो गई। उन्होंने अब तक करीब 500 किलो मिर्च इकट्ठी की है। मिर्च उगाने से उन्हें करीब ₹30,000 का लाभ हुआ, लेकिन पूरा खर्च ₹8,000 था। इस लिहाज से, लाभ खेती की लागत (cost of cultivation) से तीन गुना अधिक है।
गर्मियों में बिक्री में और भी वृद्धि होगी
मौर मिर्च का अनोखा और तीखा स्वाद इसे छाछ (मट्ठा) में डुबोकर और फिर सुखाकर प्राप्त किया जाता है। गर्मियों में इसकी मांग और भी बढ़ जाती है, जिससे उत्पादकों को अच्छी कमाई होती है। तंजावुर के किसानों को उम्मीद है कि मौर मिर्च की बिक्री (Sale of chillies) से इस वर्ष उनकी आय में और भी वृद्धि होगी।