Cucumber Farming Tips: बाराबंकी के इस किसान ने खीरे की खेती कर महज 45 दिन में हासिल की सफलता
Cucumber Farming Tips: गर्मियों में खीरे की मांग में उछाल ने किसानों के लिए एक शानदार अवसर पैदा किया है। इस सस्ती फसल की बदौलत किसानों के पास अब आय का एक बेहतरीन स्रोत है। खीरे की खेती में कम मेहनत और कम पैसे (less work and less money) लगते हैं और इससे अच्छी आय होती है, इसलिए किसान इस फसल पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। खीरे की बाजार में लगातार मांग के कारण यह फसल किसानों के लिए एक आकर्षक उद्यम बन गई है। खीरे की खेती अब किसानों की पहली प्राथमिकता बन गई है और इस फसल से होने वाला मुनाफा भी बढ़ रहा है।

खीरे की खेती से पाई सफलता
बाराबंकी जिले के सहेलियां गांव के दूरदर्शी किसान मुन्ना यादव ने खीरे की खेती का एक सफल मॉडल स्थापित किया है। उन्होंने नई कृषि तकनीकों के साथ प्रयोग किया और इस फसल से खूब पैसा कमाया। लोकल 18 से बातचीत में मुन्ना यादव ने बताया कि वे पिछले आठ-दस सालों से खीरा, टमाटर, बैगन और शिमला मिर्च (Cucumber, tomato, brinjal and capsicum) जैसी सब्जियां उगा रहे हैं। इस खेती में मुनाफा बहुत ज्यादा है और लागत कम है। उन्होंने अभी दो बीघा में खीरे लगाए हैं और वे उगने लगे हैं। इस समय खीरे की बहुत मांग है, जिससे यह पता चलता है कि वे अच्छी तरह क्यों बिकते हैं। वे जैविक तरीके से इसकी खेती करते हैं, जिसमें 70,000 से 80,000 रुपये तक का लाभ मार्जिन है और खेती की लागत लगभग 12,000 से 15,000 रुपये प्रति बीघा है। अगर बाजार भाव अनुकूल रहे तो लाभ और भी बढ़ सकता है।
खेती की तकनीक
मुन्ना यादव ने खीरे उगाने की सरल प्रक्रिया के बारे में बताया। जिसमें पहले क्षेत्र की जुताई की जाती है और फिर मेड़ बनाने के लिए गीली घास बिछाई जाती है। फिर गड्ढों में खीरे के पौधे बोए जाते हैं। पौधों के बढ़ने के दौरान उन्हें बांधने के लिए बांस के धागे का उपयोग किया जाता है, जो स्वस्थ विकास (Healthy Growth) को बढ़ावा देता है और बीमारी की संभावना को कम करता है। 45 दिनों में खीरे की फसल तैयार होने लगती है।